Wednesday, April 8, 2015

कफ़न

आज मेरे मज़्मून में तन के उस कपड़े  का ज़िकर होगा जो हर आदम के औलाद को इस रोये ज़मीन से कूंच करते वक़्त पेहेनना होता है चाहे वो जिस मज़हब का हो मर्द औरत बच्चे बुड्ढे जो हो सब को इस कपड़े की ज़रूरत लाज़िम आता है,
 
    मेने इस कपड़े को मौज़ेए बहस इसलिए बना या की ये एक इंसान केलिए ऐसा कपड़ा है जिसे हर कोई को कभी न कभी पहनना है सिवाए शहीदों के बता दूँ के जो शख्श खुदा के राह में या वतन के खातिर अपनी जान की क़ुरबानी देता है तो इस्लाम में उस केलिए उसी कपड़े में दो गज़ ज़मीन के तल जनाजह के नमाज़ के बाद दफन करदेने का हुकुम है लेकिन गैर इस्लाम में भी वतन के खातिर क़ुर्बान होने वाले शख़्स को उसी कपडे में चाहे तो जला दिया जाता है चाहे उसे उसके अक़ीदे के मुताबिक़ दफनादिया जा ता है।
 
      ये कपड़ा तक़रीबन हर मज़हब में सफ़ेद रंग का होता है जिसे हम कफ़न के नाम से जानते हैं, हाँ ये वही कफ़न है जो हर शख़्स को मरने के बाद नसीब होता है जिसका size  तक़रीबन 2 गज़ होता है, फिर उसे कंधे के सहारे क़ब्रिस्तान लेजाया जाता है और फिर ( मिन्हा ख़ल्कना कुम व फीहा नुईदुकूम व मिन्हा नुख्रिजुकुम तारत्न उखरा ) कहते हुए ज़मीन में दफन करदेते  हैं। ये जो brecket में लिखा हे ये क़ुरआन का एक टुकड़ा है, हाँ हिन्दू मज़हब में राम राम सततय कहते हुए श्मशान लेजाते हैं और वहाँ मुर्दे को जला कर राख को गंगा या किसी नदी में बहा देते हैं ता के उसके रूह को सुकून पहुंचे।

      हाँ इस कपड़े की हक़ीक़त भी जान्ना हमारे लये ख़ासा ज़रूरी है इतना तो ज़रूर हम जानते है की ये एक सफ़ेद कपड़ा होता है जीसे मय्यत को उढ़ा कर जला दिया जाता है या दफ़ना दया जाता है ..... लेकिन ऐसा क्यू क्या जाता है ये तो हमे भी नही पता लेकिन इतना तो हमे मालूम है की बरसो से ये रवायत चलती आरही है जिसको हम अपने अक़ीदे के हिसाब से अपने अम्ल में रख लिए हैं।

     एक बात दफन कफ़न के सिलसिले से ज़रूर गोष गुज़ार करदेना चाहता हूँ के कफ़न दफन का मोजिद कोन है(ईजाद करने वाला) तो आपको बताता चलूँ के  बाबा आदम के दो बीते थे उन दोनों को किसी बात पे बहसा बेसी हुई और एक ने ये फैसला करलिया की दोसरे को मार देना है और ऐसा ही हुआ जब क़ाबिल ने हाबिल को मार दिया तो अब सोचने लगा और इस फ़िक्र में पड़ग्या की इस मुर्दे का क्या करूँ तो अचानक आसमान से 2 कौवा (crow ) लड़ते हुए आरहा था तभी एक गिरा जैसे ही गिरा दोसर वाला crow आया और अपने चोंच से ज़मीन खुदा और उस crow को मिटटी के तल दबो दिया यही से कफ़न दफन का तरीक़ा शुरू हुआ इस्लाम में हाँ ये जो क़त्ल था ज़मीन पे सबसे पहला क़त्ल था।

     हाँ ये तो बताना भूल ही गया सफ़ेद कपड़ा अरब मुमालिक में शादी का जोड़ा होता है और ईसाई मज़हब में भी शादी के मुके पे सफ़ेद रंग के कपड़े में लड़कियां मइके से ससुराल कूंच करती है और कहीं कहीं जब बच्चा पैदा होता है तो  उसे भी सफ़ेद कपड़े पहनाते  हैं।।  
                         तो ये है कफ़न कभी ख़ुशी कभी गम

      इस हवाले से एक शेर कह कर  अपने मज़्मून(essay ) को आख़री कगार पर ला खड़ा करता हूँ।
         शेर..........
                   दुन्या गाड़ी का जक्शन है कोई आये कोई जाये
                    जीवन में कुछ और नही बस Tata Bye Bye

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