Sunday, February 22, 2015

NA UMMEED

सदयूं     घूमता  झूमता   रहा  मैं

हर दम तेरा इंतज़ार करता रहा मैं

तुझसे   मुद्द्त   हुये  यारा  मिले

तेरे दिल में नही वो जो दिल में मेरे

पता होता जो ये हादसा होगा आज 

तो  क़ुर्बत हासिल न करता मैं  कल

चलो अच्छा हुआ जो होना था होगया

अबतो  तेरे दिल को सुकूंन तो मिलगया

ज़करिया ऐसी उम्मीदें   लगाता  क्यू?

 ऐसी दुन्याँ से उम्मीद रखता  है क्यू?

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