दौरे हाज़िर को ये देखते हुए महसूस होता है की बाग़ में फूल तो हज़ार हा हज़ार क़िस्म के हैं लेकिन खुशबु किसी में नही पेड़ में फ़ल भरा पड़ा हैं लेकिन ज़ायक़ा किसी में नहीं, बस ठीक इसी तरह हमारे मुल्क की सियासत का हाल है, नेता जी तो क़िस्म क़िस्म के हैं लेकिन देश की भलाई केलिए नहीं सिर्फ अपनी कुर्सी केलिए और अपने इज़्ज़त व मर्तबा केलिए न के देश के जनता की भलाई केलिए,
हाँ अगर नेता जी चाहे तो जिस तरह हमसब की मदद से ये कुर्सी संभालते है ठीक इसी तरह वो अपनी तवज्जह से इस सर ज़मीन को फिरसे हरा भरा करसकते हैं लेकिन शर्त है की नेता जी चाहलें,
ये पढ़ते हुए भले ही आपको अजीब सा महसूस होरहा होगा लेकिन हक़ीक़त यही है की फिर से हम अपने मुल्क को अपने इल्म व हुनर और लग्न के ज़रिये एक अच्छे रहनुमा के ज़ेरे सरपरस्त अपने मुल्क को सँवारने में एक सर (HEAD) होकर जुट जाये तभी हमारा देश सोने की चिड़या बनके उभरेगी वरना फिर वही मिटटी का पुतला बना का बना रह्जायेगा,
हाँ हम ये बखूबी जानते हैं की कोई भी चीज़ बगैर स्पोर्ट के थम नही सकती ठीक इसी तरह हम अपने मुल्क को फिर से सोने का चिड़या देखना चाहते है तो हमसबको एक ऐसे नेता जी को चुनना होगा जो हमसबका खैर खः हो और हमारी ज़रूरत्तों को समझने वाला हो और हमारे मुल्क की खातिर अपनी जान भी क़ुर्बान करदे ज़रूरत पर्ने पर, लेकिन इस केलिए शर्त है की हमभी नेता जी के शाना ब्शना खड़े रहें तभी ये कुछ अच्छा कर पाएंगे नही तो ये लड़खड़ा के गिर पड़ेंगे और सारा काम वहीं का वहीं रुका रेहजायेगा।।।।।।।।।
हाँ अगर नेता जी चाहे तो जिस तरह हमसब की मदद से ये कुर्सी संभालते है ठीक इसी तरह वो अपनी तवज्जह से इस सर ज़मीन को फिरसे हरा भरा करसकते हैं लेकिन शर्त है की नेता जी चाहलें,
ये पढ़ते हुए भले ही आपको अजीब सा महसूस होरहा होगा लेकिन हक़ीक़त यही है की फिर से हम अपने मुल्क को अपने इल्म व हुनर और लग्न के ज़रिये एक अच्छे रहनुमा के ज़ेरे सरपरस्त अपने मुल्क को सँवारने में एक सर (HEAD) होकर जुट जाये तभी हमारा देश सोने की चिड़या बनके उभरेगी वरना फिर वही मिटटी का पुतला बना का बना रह्जायेगा,
हाँ हम ये बखूबी जानते हैं की कोई भी चीज़ बगैर स्पोर्ट के थम नही सकती ठीक इसी तरह हम अपने मुल्क को फिर से सोने का चिड़या देखना चाहते है तो हमसबको एक ऐसे नेता जी को चुनना होगा जो हमसबका खैर खः हो और हमारी ज़रूरत्तों को समझने वाला हो और हमारे मुल्क की खातिर अपनी जान भी क़ुर्बान करदे ज़रूरत पर्ने पर, लेकिन इस केलिए शर्त है की हमभी नेता जी के शाना ब्शना खड़े रहें तभी ये कुछ अच्छा कर पाएंगे नही तो ये लड़खड़ा के गिर पड़ेंगे और सारा काम वहीं का वहीं रुका रेहजायेगा।।।।।।।।।
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