Friday, February 6, 2015

जुनूं का मंज़र

जुनूं का परचम लहराउंगा मैं सुनाउंगा मैं है क्या चीज़ जुनूं बताऊंगा मैं सुनाऊंगा मैं जो ज़िद है क्या मुझसे तूने बताऊंगा मैं ख़ुदा गवाह है जो ज़ुल्म किया है मुझपे है दिल ने तोड़ा किसीका तूने दिखाऊंगा मैं किया है जो तूने इसके साथ जहाँसे बताऊंगा मैं देखलेना सुन भी लेना बता भी देना उससे क्या है कहता सुना भी बता भी देना मुझसे? है एक इल्तिजा तुझसे ऐ दिल रूबा किसी और के साथ भी न ऐसा करना ज़करिया कैसी उम्मीदें लगाएं है बेठा उस्से ये तो उम्मीदों की धज्जियाँ उड़ा ती है हरदम। M Z FARMANI

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