Saturday, August 27, 2016

माँ दूर है तू चला आरहा हूँ मैं


माँ दूर है आजा क़रीब तू...

तेरी याद हरदम सताती है मुझको।
तेरा बोसा लेना हरदम याद दिलाता मुझको।
तू तो पल भर भी ना साथ रह स्की मेरे।


माँ दूर है आजा क़रीब तू...

तेरा बेटा तुझको पुकारे है हरदम।
तेरे साथ  गुज़रे लम्हे याद करता हरदम।
तेरी गा ई हुई लोरी गाता है हरदम।


  माँ दूर है आजा क़रीब तू...

रातों को ख्वाबों में डोबा रहता है तेरा बेटा।
सोता हुआ नींद में जग के उठ जाता है तेरा बेटा।
सदयों गुज़र गया तुझको देखे एय मेरी माँ 
ख्वाबों में इंतज़ार करता रहता है तेरा बेटा।


  माँ दूर है आजा क़रीब तू...

हूँ में यहाँ खुश पापा,भाई और बहनों के साथ।
हर कोई है साथ मेरे इस खुश फहमी में हूँ मैं आज।
सुन ऐ माँ तेरे बगैर सब अधूरा सा लगता है आज।


माँ दूर है आजा क़रीब तू...

बस अब ये दुआ रबसे करता हूँ मैं
के जन्नत के बागों में घुमो ऐ माँ।
ऐ रब्बे करीम "ज़करिया" की इल्तजा है बस
हमारी माँओं को रखना जन्नत के महलों में बस।


माँ दूर है तू... चला आरहा हूँ मैं।

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