अलविदा ऐ साथियों अलविदा अहले चमन।
खुश नुमा महबूब दिलकश है हमारा फेयरवेल।
है सभी उस्ताद मुश्फिक फख्र की ये बात है।
क्या चमक और क्या दमक कैसी हसीं ये शाम है।
ज़र्रा ज़र्रा शाद है तिफ़ले L U में लग्न।
अलविदा ऐ साथियों अलविदा अहले चमन।
साथ रहकर तेरे मुझसे हो गई हो गर ख़ता।
सामने हाज़िर हूँ तेरे बेखता हूँ गर बता।
आज ही तू ले ले बदला पेश है मेरा बदन।
अलविदा ऐ साथियों अलविदा अहले चमन।
बाग बां मौजूद है बाग जो मुरझा गया।
रंज है मुझको यकीनन आखिरी दिन आ गया।
एक तरफ खुशियों का राज एक तरफ रंज की किरण।
अलविदा ऐ साथियों अलविदा अहले चमन।
खुश नुमा महबूब दिल कश है हमारा farewell.
बटके हम सब टोलियों में काम को अपने चले।
हम जो रह रह कर भी यारों याद तमको आएंगे।
जा रहे हो दोस्तों !...फिर कभी होगी मिलन।
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