Sunday, November 5, 2017

ख़्याल....

(part 1)
अब तुम भी प्यार करने लगी हो.
 हमारे क़रीब आने लगी हो. 

अब ऐसा लगने लगा है जहाँ गौद है मेरे
तुम दूर थी बहुत क़रीब आने लगी हो.

हर ख़ुशी हर राज़ तेरे गौद में है.
यही न तुम बेहद क़रीब आने लगी हो. 

एक सवाल है तुमसे..?

इतने दिनों से इतनी दूर कियूं थी तू?
पता है मुझे दूर रहकर क़रीब आने लगी हो. 

हाँ ये बताओ प्यार जब नहीं था मुझपे क्या?
पहले दूर रहकर अब क़रीब आने लगी लगी हो. 

सुनों..... 
नाज़ है मुझे की तुम मुहब्बत करती हो.
अब तुम मुहब्बत करती हो जब से मैं कररहा हूँ. 

  
  


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