Sunday, May 17, 2015

दोस्त रूठ गया


               
    दोस्ती फिर गया रूठ अब क्या करूँ......? 2महीना पहले आगे बढ़ाने वाला हाथ कल  दिन के 1बजे कुछ अलट पलट होने की वजह से शोशल नटव्रक के सारी ID से अपने आप को दूर किसी ने मुझे करदिया जिस्से हदसे ज़ियादह दुलार करता हूँ, जिसपे खुदसे ज़ियादह भरोसा क्या और हमेशा करूँगा... जिसकी वजह से किसी कमीनी ज़ात से छुटकारा मिला मुझे.. सबसे पहले रबका शुक्र अदा करता हूँ के उसने शब....को मेरी दोस्ती केलिये भेझा भलेही 2महीना कुछ दिन केलये क्यू ना।।।

उन दिनों जब मैं हदसे ज़ियादह परेशान था के अचानक एक खूबसूरत हाथ दोस्ती केलिये  आटपका लेकिन मैं डर भी रहा था के ये ओरों सा तो नही जिस्की वजह से मैं उलझन में पड़ जाता हूँ पर हक़ीक़त तो ये की आज जितना सदमे में हूँ शायद कभी न रहा हूँगा उस्से मुआफ़ी दर महाफि माँगा पर मूम दिल आज ना पिघल स्का भला पिघलता भी क्यू.....? मेने उसके दिल को ठेस जो पहुँचाया है।
  हाँ आज ही उस गलती को accept करता हुँ के में बहुत बड़ी बात कहदी जो मुझे नही कहनी चाहिये , बस जज़्बाती हूँ जब किसी उलझन में होता हूँ तो किसी से कुछ भी कह देता बाद में अफ़सोस करता हूँ लेकिन काफी देर होजाता है तबतक किसी का दिल चाक होचुका होता है बाद में माफ़ी मांगता हूँ जो नही मिलती मुझे, इस्से और गम में पर जाता और तबीयत ख़राब होजाती  और मैं उस गम की वजह तहक़ीक़ नही करपाता मैं।

     ख़ैर उसकी पियारी बातें हमे ज़रूर सतायेगी क्यू के उस्से सिर्फ और सिर्फ मेरी बातें शोशल मीडिया पे हुती रही है और बस चन्द मिंट आमने सामने हुई वो भी 1घण्टा 15मिंट इन्तज़ार करने के बाद जब वो examदे के अपने पुराने दोस्तों के साथ जारहे थे न तो सहिसे देख स्का और नही बात करस्का खैर मेरी किस्मत ही ऐसी है दोस्त सिर्फ चन्द दिनों ही केलिए मिलते हैं और फिर किसी बात पे रूठ के कहीं दूर चले जाते मुझे छोड़ के.......पर उम्मीद अबभी लगी रहती है।
   हाँ :--इसी वजह से किसी से जल्दी दोस्ती करता नही मैं और दोस्ती करने से पहले ही बतदेता हूँ के मेरी दोस्ती किसी को रास नही आती है...हाँ मैं आप को भी बता दिया था, और जिसने कल मुझसे रूठ के अपने खूबसूरत रुख़ को मुझसे मूड लिया उसे भी बड़े ताकीद से बोला था के आप भी न अपने बढ़ाये क़दम को रुक न लेना,,, पर उसने ऐसा भरोसा दिलाया के मैं ख़ुशी से बाग़ बाग़ हो गया और उस दोस्ती को दिलकश अंदाज़ में क़ुबूल करलिया .. जिसे कल आंसू के साथ बिदा करना पर रहा था जो मुझसे कभी नही होसकता।। इस मोके पर 1शेर यद आता है।।।।
 ज़मीं पे फूल गिरता है उठाता है कोई            कोई

दोस्ती सभी से होती है निभाता है कोई कोई।

गुलाब का फूल तोड़ा नही जाता

खुद से दोस्ती छोड़ा नही  जाता।

    हाय अफ़सोस के ऐसी गलती न होती मुझसे जो इस मोड़ पे खड़ा दोस्ती का गला घोटता हुआ अपने आँखों से देखने पे मजबूर होरहा हूँ, खैर मैं भी खुदा ही का बनदा हूँ  मुझसे भी गलती होसकती है अगर खुदा अपने बन्दों की गलती माफ़ करसकता है तो फिर बन्दा बन्दा को क्यू नही माफ़ करसकता है मुझे अपने दोस्त पे चढ़ती सूरज की तरह यक़ीन है के माफ़ी के साथ चाहे जो सज़ा दे पर फिरसे अपनी दोस्ती को वही मुक़ाम पे ला खड़ा करदे.

    अब मैं आखिर में अपने हरदिल अज़ीज़ दोस्त से request करता हूँ  की हमने जो गलती की है उसका बदल जिस रूप में लेले पर दोस्ती तोड़के न ले उसे अपनी जगह पे बाकी रखें और शाना बशाना फिर से हो जाये हमदोनों।

और मैं अपने रब से भी दुआ करता हूँ की ऐ हमारे रब हमे फिरसे वो gift अता करदे जो किसी बड़ी गलती की वजह से 2रोज़ से रुख़ अपना मोड़े हुये है ऐ हमारे रब मेरी उस गलती के बदले इस क़ीमती गिफ्ट को न रूठने दे पिलिज़ फिरसे अता करदे  और उनके दिल को मूम बना दे फिरसे और जोड़ दे मुझसे..... आमीन.


Friday, May 1, 2015

FAREWELL



अलविदा ऐ साथियों अलविदा अहले चमन।

खुश नुमा महबूब दिलकश है हमारा फेयरवेल।

है सभी उस्ताद मुश्फिक फख्र की  ये बात है।

क्या चमक और क्या दमक कैसी हसीं ये शाम है।

ज़र्रा ज़र्रा शाद है तिफ़ले L U में लग्न।

अलविदा ऐ साथियों अलविदा अहले चमन।

साथ रहकर तेरे मुझसे हो गई हो गर ख़ता।

सामने हाज़िर हूँ तेरे बेखता हूँ गर   बता।

आज ही तू ले ले बदला पेश है मेरा बदन।

अलविदा ऐ साथियों अलविदा अहले चमन।

बाग बां   मौजूद है बाग जो मुरझा  गया।

रंज है मुझको यकीनन आखिरी दिन आ गया।

एक तरफ खुशियों का राज एक तरफ रंज की किरण।

अलविदा ऐ साथियों अलविदा अहले चमन।

खुश नुमा महबूब दिल कश है हमारा farewell.

बटके हम सब टोलियों में  काम को अपने चले।

हम जो रह रह कर भी यारों याद  तमको आएंगे।

जा रहे हो दोस्तों !...फिर कभी होगी मिलन।